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Matrubhasha Diwas 2026: Morbi की PG Patel College में भव्य कवि सम्मेलन आयोजित

मोरबी में मातृभाषा दिवस 2026 के अवसर पर साहित्यिक माहौल देखने को मिला। गुजरात उत्कर्ष चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित पी.जी. पटेल कॉलेज में गुजरात साहित्य अकादमी, गांधीनगर के संयुक्त उपक्रम से भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

Matrubhasha Diwas 2026 पर भव्य आयोजन

मोरबी की पी.जी. पटेल कॉलेज में मातृभाषा महोत्सव 2026 के अंतर्गत 21 फरवरी 2026 को विशेष कवि सम्मेलन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम संस्थान के ट्रस्टी देवकरणभाई आद्रोजा और जतीनभाई आद्रोजा की प्रेरणा से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत मंगल प्रार्थना और दीप प्रज्वलन से हुई, जिससे पूरे परिसर में सांस्कृतिक और साहित्यिक वातावरण बन गया। इसके बाद कॉलेज के आचार्य डॉ. रवीन्द्र भट्ट ने उपस्थित अतिथियों, प्राध्यापकों और विद्यार्थियों का शब्दों से स्वागत करते हुए मातृभाषा के महत्व पर प्रकाश डाला।

Matrubhasha Diwas 2026 कार्यक्रम की विशेष झलक

समारोह के दौरान मंच पर उपस्थित महानुभावों का पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया। कार्यक्रम के प्रेरक एवं गुजरात साहित्य अकादमी, गांधीनगर के अध्यक्ष डॉ. भाग्येश जहा का ऑडियो शुभेच्छा संदेश भी सुनाया गया, जिसने आयोजन को और गरिमा प्रदान की।

इस कवि सम्मेलन में प्रतिष्ठित कवि राम वारोतारिया और कवि जनार्दन दवे ने अपनी प्रभावशाली काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोनों कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से मातृभाषा के गौरव, संवेदना और सांस्कृतिक महत्व को खूबसूरती से प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का संचालन भी बेहद रोचक शैली में किया गया, जिससे पूरे समय श्रोताओं की रुचि बनी रही।

इस साहित्यिक आयोजन में मोरबी शहर के साहित्यप्रेमी, प्राध्यापक और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उपस्थित लोगों ने कवियों की प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया और मातृभाषा के प्रति अपने जुड़ाव को व्यक्त किया।

कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ प्राध्यापक अनिलभाई कंसारा ने आभार व्यक्त करते हुए सभी अतिथियों, आयोजकों और उपस्थित जनों का धन्यवाद किया।

इस सफल आयोजन में कॉलेज के आचार्य रवीन्द्र भट्ट, संयोजक पूनम फेफर, स्टाफ सदस्यों और विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। आयोजन के माध्यम से मातृभाषा के प्रति प्रेम, सम्मान और संवेदनशीलता को मजबूत करने का सराहनीय प्रयास किया गया।